रात ख्वाब मे क्या देखता हूँ
की उसने अपने हाथों से अपना फ़ोन नंबर
मेरे हाथों पर लिख दिया है
और अपने घर का पता बताया है
मुझे बुलाया भी है
जागता हूँ तो हाथों पर क्या देखता हूँ
हाथों पर नम्बर तो मिट चुका है
पर हथेली पर कलम चलने का निशान बाकी है
उसके घर का पता तो याद नही है
पर अभी भी यादों मे एक मकान बाकी है
मानस भारद्वाज
Saturday, July 12, 2008
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11 comments:
Raat haathon main tera naam likh diya.
raat bhar tujhko hi sunaata raha
Teri hansi, rona tera, aadat teri batata raha
Man mera tera hi deewana hai, tujhko mujhse wo milata raha
Ab aa jaao tum kabhi saamne, din ko sunhara tum kar do,
Raat beeti bahut aaram se, din mujhko abhi tak jalata raha
पर हथेली पर कलम चलने का निशान बाकी है
उसके घर का पता तो याद नही है
पर अभी भी यादों मे एक मकान बाकी है
manas bhaiyya accha likha hai....
lekin ye angreji word use na kkya karo maja nahi aata phir........
yaar bhaanje jee ab to kamaal kar rahe
kya baat hai yaar manas yaar kismat wala hai uska makaan kai nishaan to mil gaye aur yaadast bahut achchi hai yo subah tak yaad raha .....likha bahut achca hai
ख्वाब का हकीकी पहलु खूबसूरत है...
khwab ki tarah aapki rachna bhi khoobsoorat aur abhivyakti bhi sunder...achchi bhaavpoorna rachna...
अभी भी यादों मे एक मकान बाकी है
....
bahut pyare ehsaasat hain...
Manas ne abhi muthhi bhar zamee naapi hai..
aage saara aasmaan abhi baaki hai...
bahut aage jaayega mera bhai..
"Subhkamnayein"
छोटी लेकिन बोलती सी....
भावपूर्ण रचना........
बधाई......
मानस जी.....
कम से कम इतना तो है वो,सपनों में तो आते हैं,
मेरी यादों को फिर से ,जीवन का भ्र्म दे जाते हैं,
गीता पंडित (शमा)
very nice..
उर की निदा को क्या मंजू परिधान दी है आप,सदाकत में.........
जागता हूँ तो हाथों पर क्या देखता हूँ
हाथों पर नम्बर तो मिट चुका है
पर हथेली पर कलम चलने का निशान बाकी है
उसके घर का पता तो याद नही है
wah .kya khub likha hai ..............
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