जिन्दगी हवाओं मे बहती है
लहरों मे मचलती है
ख्वाबों मे बेहेकती है
आसमा मे रंगों मे रहती है
जिन्दगी उमंगों की पोटली है
तरंगों का खजाना है
ख्वाइशों का चहकना है
यादों का दहकना है
जिन्दगी एक कविता पुरानी है
खोयी हुई एक कहानी है
यू तो पड़े हुए मिल जाती है
पर खोजो तो हाथ नही आनी है
जिन्दगी रागों का समंदर है
यू तो कुछ भी नही है
पर बहुत कुछ हर किसी के अंदर है
जिंदगी को लिखूं तो बहुत शब्द हैं
न लिखूं तो कुछ भी कहाँ है
मुझे नही पता
जिंदगी क्या है
शब्धों मे कहूं तो सिर्फ़ इतना है
वो जिन्दगी जिन्दगी नही है
जो जिन्दगी तेरे बिना है
मानस भारद्वाज
Monday, July 14, 2008
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8 comments:
जिन्दगी रागों का समंदर है
यू तो कुछ भी नही है
पर बहुत कुछ हर किसी के अंदर है.............
बहुत ही उम्दा.
"जिन्दगी उमंगों की पोटली है
तरंगों का खजाना है
ख्वाइशों का चहकना है
यादों का दहकना है"
काफी हसीन रचना है ज़िन्दगी को लेकर...
जिंदगी को लिखूं तो बहुत शब्द हैं
न लिखूं तो कुछ भी कहाँ है
मुझे नही पता
जिंदगी क्या है
शब्धों मे कहूं तो सिर्फ़ इतना है
वो जिन्दगी जिन्दगी नही है
जो जिन्दगी तेरे बिना है
jindagi manas k ehesaason main hai jindagi manas k pyar main hai
jindagi manas k shabdo main hai jindagi manas k kalammain hai
manas se bhetar aur kaun janega jindagi ko...
ye is liye khe raha huin kyunki maine abhi hi jindagi dekhi hai padi hai aur padane wala hai manas
क्या अलंकार से अलंकृत किया है आपने साथी....
[b]ये कविता बहुत ही अच्छी है
दिल को छूने वाली लाजबाब ...............
bahut hi badhiya. likhte rahen.
---
idhar se bhi guzaren;
ultateer
manas ji .good lines u write ...........
जिन्दगी रागों का समंदर है
यू तो कुछ भी नही है
पर बहुत कुछ हर किसी के अंदर है
kafi payari rachna hai .........
bahut hi umda ...
जिंदगी को लिखूं तो बहुत शब्द हैं
न लिखूं तो कुछ भी कहाँ है
मुझे नही पता
जिंदगी क्या है
शब्धों मे कहूं तो सिर्फ़ इतना है
ki aap aane wale time ki neev ho ...aise hi likhte raho ......keep it up
{deepa}
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