Wednesday, July 16, 2008

जितनी तमन्नाये थी सब पूरी हो गई थी

जितनी तमन्नाये थी सब पूरी हो गई थी
पर फिर भी दिल मे बैचैनी थी वो क्यों थी

जिस से मोहब्बत थी वो मिल गई थी
पर फिर भी किसी की याद थी वो क्यों थी

जितने दुःख थे आंसू मे बह गए थे
पर फिर भी आंखों मे नमी थी वो क्यों थी

मानस भारद्वाज

9 comments:

परमजीत बाली said...

bahut badhiyaa!!

Akshaya-mann said...

bahut khub mere ustaad mere sartaaj bahut khub ......
jab koi chahne wala milta hai nato isi tarhan ka darr umadta hai...
kuch aise ehessason ko hi vyakt kara hai aapne bhai.....
aisa mujhe lagta hai....

अनुराग said...

जितनी तमन्नाये थी सब पूरी हो गई थी
पर फिर भी दिल मे बैचैनी थी वो क्यों थी

khoob......bahut khoob.....

pathik said...

बहुत खूब....

Anonymous said...

manas ji ....tussi toh gr8 ho ..........जितने दुःख थे आंसू मे बह गए थे
पर फिर भी आंखों मे नमी थी वो क्यों थी

bahut hi vadiya likhya hai ji ............

रश्मि प्रभा said...

shaayad mann ki yahi gati hoti hai,
badhiyaa

Dr. RAMJI GIRI said...

sundar rachna hain....

Purnima said...

bahut khubsurat rachna hai sir
bahut sunder

हकीम जी said...

अनुनय ह्रदय