Thursday, September 11, 2008

तूने भी तो सुना हैं दरिया के पानी को

तूने भी तो सुना हैं दरिया के पानी को
फूलों सी महकती मोहब्बत की कहानी को
कि लब्जों की जबानी सब सच नहीं होती
समंदर की लहरें किसी के बस नहीं होती

ये रातों मे बहता हुआ पैगाम भी सुन ले
आँखों से टपकता हुआ एक नाम भी सुन ले
बात सिर्फ इतनी हैं यहाँ तेरी बात नहीं होती
तू वक़्त के साथ हैं पर कभी साथ नहीं होती

मेरे बस मे सिर्फ इतना हैं तेरा नाम न लूं
सरेआम तेरे साथ रहूँ पर सरेआम न लूं
पर ये यादें भी सिर्फ याद नहीं रहती
साथ हंसती हैं रोटी हैं पर साथ नहीं रहती

चिड्ती हैं खीजती हैं चिडाती हैं यादें
पल दो पल साथ ले जाती हैं यादें
मेरी दुनिया भी कभी कभी मेरी दुनिया नहीं रहती
मैं इनके साथ रहता हूँ ये मेरे साथ नहीं रहती

मानस भारद्वाज

14 comments:

Angad said...

very nice dear.......

गीता पंडित (शमा) said...

मेरी दुनिया भी कभी कभी मेरी दुनिया नहीं रहती
मैं इनके साथ रहता हूँ ये मेरे साथ नहीं रहती

bahut sundar.....pyaar men aisa hee hota hai.....

ek muktak....



कहने को बहुत कुछ था कह नहीं पाये,
सुनने को बहुत कुछ था सुन नहीं पाये,
अब ये आलम, जीते हैं, ना मरते हैँ,
तेरे बिन कुछ भी हम सोच नहीं पाये ॥

गीता पंडित

Ramesh said...

दरिया का पानी बहुत सुन्दर है.. इसे बनाए रखो ..शाबाश लाजवाब ...परन्तु याद रखो ...

हार जीत एक हिस्सा है
हिस्सों में ना तकसीम हों हम
तकसीमो से मन टूटे है
संताप धरा के रूठे है
तुम वक्त पकड़ लो हाथो में
फिर देखो अपनी बात बने
और हार भी अपनी जीत बने ....

Ramesh said...

दरिया का पानी बहुत सुन्दर है.. इसे बनाए रखो ..शाबाश लाजवाब ...परन्तु याद रखो ...

हार जीत एक हिस्सा है
हिस्सों में ना तकसीम हों हम
तकसीमो से मन टूटे है
संताप धरा के रूठे है
तुम वक्त पकड़ लो हाथो में
फिर देखो अपनी बात बने
और हार भी अपनी जीत बने ....

Vijay Kumar Sappatti said...

"ये रातों मे बहता हुआ पैगाम भी सुन ले
आँखों से टपकता हुआ एक नाम भी सुन ले
बात सिर्फ इतनी हैं यहाँ तेरी बात नहीं होती
तू वक़्त के साथ हैं पर कभी साथ नहीं होती"

Ye lines are the best , man ko choo gayi hai boss.
yaar main bahut jaldi bhopal aa raha hoon , aapse milunga jarur,

vijay

GOPAL K.. MAI SHAYAR TO NAHI... said...

वाह, क्या बात है दोस्त..!!
शानदार कवित लिखी है आपने..
अच्छी लगी पढ़कर..
बधाई..

Amit K. Sagar said...

Really very nice one. keet it up dear.

रश्मि प्रभा said...

समंदर की लहरें किसी के बस नहीं होती
........ sahi zubaani aur bahut gahri,samandar si

Dr. RAMJI GIRI said...

too good, really touching.....

शहरोज़ said...

श्रेष्ठ कार्य किये हैं.
आप ने ब्लॉग ke maarfat जो बीडा उठाया है,निश्चित ही सराहनीय है.
कभी समय मिले तो हमारे भी दिन-रात आकर देख लें:

http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/
http://hamzabaan.blogspot.com/
http://saajha-sarokaar.blogspot.com/

Anonymous said...

मेरे बस मे सिर्फ इतना हैं तेरा नाम न लूं
सरेआम तेरे साथ रहूँ पर सरेआम न लूं
पर ये यादें भी सिर्फ याद नहीं रहती
साथ हंसती हैं रोटी हैं पर साथ नहीं रहती
manas ............bahut hi acha likha hai aapne .[deepika mahajan]

durgesh said...

very very good lago raho.........

श्रद्धा जैन said...

bhaut sunder manas
likhte rahe

JIT said...

"ये रातों मे बहता हुआ पैगाम भी सुन ले
आँखों से टपकता हुआ एक नाम भी सुन ले
बात सिर्फ इतनी हैं यहाँ तेरी बात नहीं होती
तू वक़्त के साथ हैं पर कभी साथ नहीं होती"


bahut sundar likha hai bhai,,,,
waise to puri hi acchhi he,,,pr ye char line sabse jyada pasand aayi...
likhte rahiye dost