Tuesday, March 24, 2009

चाँद भरी दुपहरी मे कई बार निकलता है

चाँद भरी दुपहरी मे कई बार निकलता है
एक लड़की उसको देख आँखें मलती है
सूरज उसको टूक टूक देखा करता है
ऐसे ही तो सारी दुनिया चलती है

उसके न होने से कुछ नहीं बिगड़ता है
पर कुछ बात है जो मुझको खलती है
ये बात सच है सबको कड़वी लगती है
जाने क्यों रातो मे एक बस्ती जलती है

कौन ध्यान देगा बड़ी बेनाम सी बातें हैं
कहने को तो सारी बातें आम सी बातें हैं
सुना है एक शख्श बिलकुल मेरे जैसा है
अभी भी एक लड़की एक लड़के पर मरती है

मानस भारद्वाज

4 comments:

Harkirat Haqeer said...

bhot sunder...bhot khoob...!!

Yogesh said...

Nice one Manas...

last 2 lines are amazing...

Meet's world of poetries said...

bahut khoob.....

रश्मि प्रभा... said...

is kavita ko apni aawaaz me,apne chote se parichay ke saath aagami kavya-manch ke liye bhej do,mere mail par