Saturday, January 31, 2009

तू जेहर के प्याले मे अमृत भर दे

तू जेहेर के प्याले मे अमृत भर दे
तू एक बार मुझे छू ले अमर कर दे

मैं अपने लिए कुछ ज्यादा नही चाहता
दो पल सुख से जी लूँ ऐसा घर भर दे

मैं तमाम उम्र उजालों मे रहूँगा
मैं जितना रोया उतनी रौशनी कर दे

मैं अब मोहब्बत की बातें भी नही करता हूँ
कोई मेरा ये दर्द समझे इसे कम कर दे

मानस भारद्वाज

3 comments:

रश्मि प्रभा said...

pyaar ka dard khud dawa ban jayega,ek din jo purana ho jaye.......
bahut gahan manahsthiti ko likha hai

Yogesh said...

अच्छा लिखा है आपने, पर शायद आप इस से बहतर लिख सकते हैं


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Meet's world of poetries said...

main tamam umra ujalo me rahunga
main jitna roya utni roshni kar de
best lines Manas........lovely poetry